इश्तिहारों में लिखा देखा
अखबारो में लिखा देखा
मजबूती का दावा
घर के किवारों में लिखा देखा
रंगीनियत का दावा
बहारों में लिखा देखा
खूबसूरती का दावा
नज़ारों में लिखा देखा
गर्मजोशी का दावा
अंगारों में लिखा देखा
जगमगाने का दावा
सितारों में लिखा देखा
अहसासों का दावा
इश्तिहारों में लिखा देखा।
हुकूमत का हक़
दरबारों में लिखा देखा
ये सब इंसान के साथी होते है
पद और प्रभाव के बाराती होते है।
मन के बदलाव की साथ ही
बदलती है इनकी फितरत
सच कभी इंसान के दिल पे
कभी दीवार की दरारों में लिखा
होते समझौते और करारों में लिखा देखा
सब के सब दावों कभी ना खरा देखा।
कभी ना खरा देखा।
Yatharth
Saturday, December 26, 2015
कभी दीवार की दरारों में लिखा देखा
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